GST प्रणाली में Input Tax Credit (ITC) को सबसे बड़ी सुविधा माना गया है, जिससे व्यापारियों को दोहरे कर से राहत मिलती है। लेकिन यह राहत बिना शर्त नहीं है। GST कानून में कुछ विशेष खर्चों पर ITC को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है, जिसे ‘Blocked ITC’ कहा जाता है। यह व्यवस्था CGST Act की धारा 17(5) के तहत लागू होती है। बहुत से व्यापारी और अकाउंटेंट इन खर्चों पर अनजाने में ITC क्लेम कर लेते हैं और बाद में विभागीय नोटिस, ब्याज और पेनल्टी का सामना करना पड़ता है। इसलिए इस लेख के माध्यम से हम यह समझने का प्रयास करेंगे कि किन खर्चों पर ITC नहीं मिलता, क्यों नहीं मिलता, और इससे बचने के व्यावहारिक उपाय क्या हैं?


सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि धारा 17(5) का उद्देश्य उन खर्चों को ITC से बाहर करना है जो व्यापार से सीधे संबंधित नहीं होते, या जिनका दुरुपयोग आसानी से हो सकता है। जैसे — निजी लाभ, गैर-व्यावसायिक उपयोग, व्यक्तिगत सहूलियत आदि। सबसे पहला और आम उदाहरण मोटर वाहनों का है। यदि कोई मोटर वाहन जिसकी बैठने की क्षमता 13 से कम है (जैसे कार, SUV आदि), उसे खरीदा गया हो तो उस पर ITC नहीं मिलेगा। हां, यदि वह वाहन टैक्सी सेवा, ड्राइविंग स्कूल या पुनः बिक्री के लिए खरीदा गया हो तो ITC लिया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई कंपनी अपने डायरेक्टर के लिए SUV खरीदती है तो उस पर ITC नहीं मिलेगा, लेकिन यदि वही वाहन Ola या Uber जैसे कैब ऑपरेटर द्वारा खरीदी गई हो, तो ITC मान्य होगा।

इसके अतिरिक्त, खान-पान सेवाएं, कैटरिंग, बीमा, स्वास्थ्य सेवाएं, क्लब सदस्यता, जिम, स्पा, और यात्रा पैकेज जैसे खर्चे भी ITC से वंचित हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई कंपनी अपने कर्मचारियों के लिए ऑफिस में लंच की सुविधा देती है या एक रिसॉर्ट में ऑफिस टूर आयोजित करती है, तो इन खर्चों पर ITC नहीं मिलेगा। हालांकि, यदि कोई व्यवसाय खुद भोजन, बीमा या यात्रा सेवाएं प्रदान करता है (जैसे होटल या ट्रैवल एजेंसी), तो उन्हें अपने इनपुट पर ITC मिल सकता है।

Section 17(5) के अंतर्गत सबसे अधिक गलतफहमी निर्माण और रियल एस्टेट से जुड़े खर्चों पर होती है। यदि कोई कंपनी अपने ऑफिस या गोदाम का निर्माण खुद करवा रही है, तो उस निर्माण पर चुकाए गए GST का ITC नहीं लिया जा सकता, क्योंकि इसे 'self-use immovable property' माना जाता है। लेकिन यदि वही कंपनी किसी तीसरे पक्ष के लिए कंस्ट्रक्शन का कार्य कर रही है (जैसे बिल्डर), तो उसे ITC लेने की अनुमति है।

इस विषय पर Chief Commissioner of Central Goods and Services Tax v. Safari Retreats Pvt. Ltd.(2024) 13 GSTJ Online 338 (SC) : (2024) 52 GSTJ 321 : (2024) 23 STD 961 : (2024) 90 GSTL 3 का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 3 अक्टूबर, 2024 को दिया गया, जो इस विषय का leading precedent बन गया है।

इस केस में प्रश्न था कि क्या किसी मॉल या व्यवसायिक इमारत का निर्माण, जो आगे चलकर किराए पर दी जाएगी, ITC के अंतर्गत मान्य है?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा:

यदि इमारत का निर्माण व्यापार के लिए आवश्यक और मुख्य कार्य है (जैसे किराये पर देना), तो उस इमारत को "Plant" के रूप में Functionality Test के आधार पर समझा जा सकता है।

हालांकि, कोर्ट ने कहा कि हर केस को उसकी तथ्यों की पृष्ठभूमि में जांचना होगा और तय करना होगा कि वह निर्माण Section 17(5)(d) की अपवाद श्रेणी में आता है या नहीं।

इस निर्णय ने स्पष्ट किया कि:

  • Section 17(5)(c) और (d) संवैधानिक रूप से वैध हैं।
  • लेकिन यदि कोई निर्माण किसी सेवा आपूर्ति (जैसे Renting) का आधार है, तो ITC का दावा किया जा सकता है, बशर्ते उचित प्रमाण और उद्देश्य स्थापित किया जाए।

इसी प्रकार, चोरी गए, गिफ्ट किए गए या नष्ट हो चुके माल पर ITC नहीं लिया जा सकता। उदाहरणस्वरूप, यदि कोई कंपनी ग्राहकों को उत्पादों के फ्री सैंपल भेजती है, तो उन पर GST का ITC क्लेम नहीं किया जा सकता।

यहाँ एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि ITC ब्लॉक होने के पीछे हर केस में अपवाद (Exception) मौजूद हैं। लेकिन ये अपवाद अक्सर करदाताओं को मालूम नहीं होते और यहीं से गलती शुरू होती है। यद्यपि ITC न मिलने के ये नियम व्यापारिक दृष्टि से कठोर लगते हैं, फिर भी इनके पीछे उद्देश्य है — कर अपवंचन को रोकना और व्यवस्था को पारदर्शी बनाना।

अब प्रश्न उठता है कि इससे कैसे बचा जाए? सबसे पहला उपाय है – खर्चों को स्पष्ट रूप से दो भागों में विभाजित करें: ‘Allowable ITC’ और ‘Blocked ITC’। इसके लिए GST रिटर्न फाइलिंग से पहले सभी इनवॉइस को अच्छे से वर्गीकृत करें। दूसरा, जिन खर्चों पर Doubt हो, उनके लिए अनुभवी टैक्स सलाहकार से सलाह लें या विभाग द्वारा जारी Advance Rulings का अध्ययन करें। तीसरा, यदि कोई खर्च वैध व्यापार उद्देश्य के लिए है, तो उसका उचित डाक्यूमेंटेशन रखें जैसे–आदेश की कॉपी, भुगतान का प्रमाण और उद्देश्य की व्याख्या। यदि संभव हो तो विभागीय अधिकारियों से लिखित स्पष्टीकरण भी लिया जा सकता है।

अंततः, Section 17(5) का उद्देश्य ITC को नियंत्रित करना है, समाप्त नहीं करना। यदि व्यापारी इस अनुभाग की स्पष्ट समझ रखें और रिटर्न फाइलिंग में सावधानी बरतें, तो वे विभागीय कार्यवाहियों से बच सकते हैं। इससे ना केवल टैक्सपेयर्स को मानसिक और आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि GST प्रणाली पर भी उनका विश्वास मजबूत होगा।

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