क्या आपका ITC विभाग ने बिना सूचना के ब्लॉक कर दिया है? क्या आपको यह नहीं पता कि इसका समाधान क्या है?

Rule 86A के तहत ITC ब्लॉकिंग आज लाखों करदाताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। इस लेख में हम आपको सरल भाषा में बताएंगे – Rule 86A की असल सच्चाई, आपके कानूनी अधिकार और न्यायिक समाधान।

अगर आप भी समझना चाहते हैं कि इस परिस्थिति से सही कानूनी तरीके से कैसे निपटें, तो यह लेख आपके लिए अत्यंत उपयोगी है।

GST प्रणाली में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) व्यापारियों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा है, जो उन्हें उनके आउटपुट टैक्स दायित्व से समायोजित करने में सक्षम बनाती है। लेकिन जब ITC को अचानक ब्लॉक कर दिया जाए, तो यह न केवल नकदी प्रवाह (cash flow) को प्रभावित करता है, बल्कि करदाता के संवैधानिक अधिकारों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

Rule 86A CGST Rules, 2017 का एक ऐसा प्रावधान है, जो अधिकारियों को ITC को ब्लॉक करने की अनुमति देता है, यदि उन्हें लगता है कि ITC धोखाधड़ी से प्राप्त किया गया है। इस लेख में हम इस नियम की विस्तार से व्याख्या करेंगे, इसके कानूनी दायरे को समझेंगे, और यह जानेंगे कि एक करदाता इस स्थिति में क्या उपाय कर सकता है।


आइए सबसे पहले हमलोग यह जानते हैं कि Rule 86A क्या है?

Rule 86A के अनुसार, GST अधिकारी को यदि यह विश्वास हो कि करदाता द्वारा क्लेम किया गया ITC:

1.    फर्जी GSTIN के आधार पर प्राप्त इनवॉइस से संबंधित है,

2.    उस आपूर्ति पर आधारित है जिस पर वास्तव में टैक्स का भुगतान नहीं किया गया है,

3.    आपूर्ति वास्तव में हुई ही नहीं (bogus billing),

4.    प्राप्तकर्ता अपात्र या पंजीकृत नहीं है,

5.    या ITC किसी अन्य अनुचित तरीके से प्राप्त किया गया है—

तो अधिकारी संबंधित व्यक्ति के Electronic Credit Ledger से ITC का उपयोग आंशिक या पूर्ण रूप से रोक (Block) सकता है।

इस नियम का उद्देश्य टैक्स चोरी को रोकना और राजस्व की सुरक्षा करना है।

ITC Blocking से जुड़ी प्रमुख समस्याएं:

1.    बिना कारण बताए ITC को ब्लॉक करना;

2.    न तो कोई पूर्व सूचना दी जाती है और न ही सुनवाई का अवसर मिलता है (Natural Justice का उल्लंघन);

3.    एक वर्ष की सीमा समाप्त होने के बाद भी ITC को अनब्लॉक नहीं करना;

4.    विभागीय मनमानी और उत्पीड़न की संभावना।

Rule 86A के अंतर्गत ITC को ब्लॉक किए जाने के मामलों में विभिन्न उच्च न्यायालयों ने करदाताओं के अधिकारों की रक्षा करते हुए महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं जो इस प्रकार हैं :

1. S.S. Industries v. Union of India, R/Special Civil Application Nos. 8841/2020 & 8163/2020, Gujarat High Court, Dated : 24-12-2020

इस निर्णय में Gujarat High Court ने स्पष्ट रूप से कहा कि ITC को ब्लॉक करने से पहले GST अधिकारियों को "reason to believe" की ठोस वजह होनी चाहिए और यह कारण स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड में होना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बिना उचित कारण और प्रक्रिया के ITC ब्लॉक करना मनमानी मानी जाएगी।

2. New Nalbandh Traders v. State of Gujarat, R/Special Civil Application No. 17202/2021, Gujarat High Court, Dated : 23-02-2022  

इस मामले में कोर्ट ने यह कहा कि यदि Electronic Credit Ledger में कोई उपलब्ध बैलेंस ही नहीं है, तो Rule 86A के तहत ITC को ब्लॉक करना पूर्णतः अवैध है। इसे "negative blocking" कहा गया और इसे असंवैधानिक घोषित किया गया।

3. Samay Alloys India Pvt. Ltd. v. State of Gujarat, 2022 (61) GSTL 421 (Guj), Dated : 14-07-2022  

इस केस में भी कोर्ट ने दोहराया कि बिना Ledger में ITC बैलेंस के Rule 86A का प्रयोग नहीं हो सकता। अधिकारी को यह प्रमाणित करना आवश्यक है कि Ledger में ITC उपलब्ध है और उसे रोकने का स्पष्ट कारण मौजूद है।

इन निर्णयों से यह स्पष्ट होता है कि Rule 86A का प्रयोग करने से पहले अधिकारियों को उचित प्रक्रिया अपनाते हुए, ठोस कारणों को विधिवत रूप से दस्तावेज़ में दर्ज करना और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है। यह करदाताओं के वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक है।

Rule 86A के तहत ITC Block की अधिकतम अवधि:

Rule 86A(3) के अनुसार, ITC को अधिकतम 1 वर्ष तक के लिए ही ब्लॉक किया जा सकता है।

हालांकि व्यवहार में कई बार अधिकारी इस अवधि के बाद भी ITC को अनब्लॉक नहीं करते, जो नियम का उल्लंघन है।

करदाता के अधिकार और समाधान:

1. कारण की मांग करें: आप अधिकारी से ITC ब्लॉक करने का लिखित आदेश और कारण मांग सकते हैं।

2. विभाग को स्पष्टीकरण दें: प्रासंगिक दस्तावेज़ों के माध्यम से यह साबित करें कि ITC वैध रूप से क्लेम किया गया है।

3. High Court में याचिका दाखिल करें: यदि आपको सुनवाई नहीं दी जाती या ITC अनावश्यक रूप से ब्लॉक किया गया है, तो आप संविधान के Article 226 के तहत Writ Petition दायर कर सकते हैं।

4. समयसीमा पर निगरानी रखें: एक वर्ष की अवधि पूर्ण होते ही आप ITC को स्वतः अनब्लॉक करने की मांग कर सकते हैं।

आइए एक उदाहरण से इसे समझने का प्रयास करते है : ABC Enterprises ने Rs. 5 लाख का ITC क्लेम किया। विभाग ने Rule 86A के तहत बिना कारण बताए ITC ब्लॉक कर दिया। कंपनी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। कोर्ट ने विभाग को कारण बताने और सुनवाई देने का निर्देश दिया। परिणामस्वरूप ITC को पुनः बहाल कर दिया गया।

ITC Block होने पर उपाय – प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समझते हैं:

यदि किसी करदाता का ITC Rule 86A के अंतर्गत ब्लॉक कर दिया जाता है, तो सबसे पहले उसे विभाग से उस आदेश की प्रति प्राप्त करनी चाहिए जिसमें यह स्पष्ट हो कि ITC किस आधार पर रोका गया है।

इसके पश्चात करदाता को सभी आवश्यक दस्तावेज़ों के साथ विभाग को एक विस्तृत स्पष्टीकरण (representation) प्रस्तुत करना चाहिए। यदि विभाग इस स्पष्टीकरण को स्वीकार नहीं करता या कोई राहत नहीं मिलती, तो करदाता संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत संबंधित उच्च न्यायालय (High Court) में एक याचिका दाखिल कर सकता है।

अंततः, यदि न्यायालय आदेश देता है, तो उसी के आधार पर विभाग ITC को अनब्लॉक करता है और करदाता को उसका वैध अधिकार पुनः प्राप्त होता है।

निष्कर्ष:

Rule 86A एक महत्वपूर्ण प्रावधान है जो टैक्स धोखाधड़ी को रोकने के लिए लाया गया है, लेकिन यदि इसका दुरुपयोग हो तो यह ईमानदार करदाताओं के लिए मनमानी और न्यायिक उत्पीड़न का कारण बन सकता है।

इसलिए आवश्यक है कि:

  • करदाता अपने दस्तावेज़ों को सही और अपडेट रखें;
  • अधिकारपूर्वक कारण माँगें और समाधान के लिए तत्पर रहें;
  • आवश्यकता पड़ने पर संवैधानिक समाधान की ओर जाएं।

ITC केवल एक कर क्रेडिट नहीं, बल्कि एक वैधानिक अधिकार है जिसकी रक्षा न्याय और प्रक्रिया के साथ की जानी चाहिए।

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