क्या आप जानते हैं कि फर्जी ITC घोटाले में अब केवल व्यापारी ही नहीं, चार्टर्ड अकाउंटेंट भी सलाखों के पीछे पहुंच रहे हैं? GST कानून की धारा 132 अब बन चुकी है सख्त हथियार – जानिए कैसे एक छोटी सी गलती बना सकती है गिरफ्तारी का कारण! अगर आप GST से जुड़े हैं, तो यह लेख आपकी आंखें खोल देगा – पढ़ें वो सच्चाई जो आपको अभी तक नहीं बताई गई! (प्रासंगिक धारा: 132, केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017)

 

GST व्यवस्था में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की अवधारणा करदाताओं को राहत देने के उद्देश्य से लाई गई थी, जिससे उन्हें एक ही वस्तु या सेवा पर बार-बार कर न देना पड़े और व्यापार सुगमता से संचालित हो सके। लेकिन विडंबना यह है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने इस प्रणाली की खामियों का दुरुपयोग करते हुए फर्जी ITC (Fake ITC) का एक पूरा जाल खड़ा कर दिया। इस प्रकार के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार ने DGGI (Directorate General of GST Intelligence) को विशेष रूप से सक्रिय किया है, जो वर्तमान में पूरे देश में ऐसे मामलों की जांच और सख्त कार्रवाई कर रहा है।

फर्जी ITC वह इनपुट टैक्स क्रेडिट होता है जो बिना किसी वास्तविक आपूर्ति (Supply of Goods or Services) के, केवल कागजी इनवॉइसों (Bogus Invoices) के आधार पर क्लेम किया जाता है। कई मामलों में देखा गया है कि व्यापारियों द्वारा ऐसी फर्में बनाई जाती हैं जिनका कोई वास्तविक व्यवसायिक अस्तित्व नहीं होता, परंतु उनके नाम पर करोड़ों रुपये की इनवॉइसें जारी की जाती हैं, और उसके आधार पर आईटीसी का दावा कर लिया जाता है। यह सीधे तौर पर GST कानून के उल्लंघन के साथ-साथ राजस्व की हानि और व्यवस्था की विश्वसनीयता को कमजोर करता है।

इस तरह के मामलों में DGGI की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। यह एक केन्द्रीय खुफिया एजेंसी है जो संदेहास्पद GSTIN की पहचान कर उनके बैंक स्टेटमेंट, ई-वे बिल, पंजीकरण दस्तावेज़ों तथा अन्य डिजिटल लेन-देन की गहन जांच करती है। आवश्यकता पड़ने पर एजेंसी तलाशी (Search), जब्ती (Seizure) और गिरफ्तारी (Arrest) जैसी सख्त कार्यवाहियाँ करती है। इस एजेंसी की कार्रवाई अब केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि जमीनी स्तर पर सैकड़ों फर्जी फर्मों को बंद किया गया है, और कई मामलों में गिरफ्तारी भी हुई है।


CGST अधिनियम की धारा 132 फर्जी ITC से जुड़े अपराधों को दंडनीय बनाती है। विशेष रूप से धारा 132(1)(c) उस स्थिति को कवर करती है जब कोई व्यक्ति माल या सेवा की वास्तविक आपूर्ति के बिना फर्जी इनवॉइस के माध्यम से ITC प्राप्त करता है। धारा 132(1)(f) यह स्पष्ट करती है कि यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसी फर्म से ITC प्राप्त करता है जिसका कोई अस्तित्व नहीं है, या जो वस्तु या सेवा की आपूर्ति नहीं करती, तो यह भी अपराध है। सबसे महत्वपूर्ण है धारा 132(5), जो यह बताती है कि यदि फर्जी ITC की राशि ₹5 करोड़ या उससे अधिक है, तो अपराध को गैर-जमानती (Non-bailable) माना जाएगा, और इसके लिए पांच वर्ष तक की कारावास तथा जुर्माने का प्रावधान है।

वर्तमान में, देशभर में DGGI ने अनेक राज्यों में छापेमारी की है, जहां करोड़ों रुपये की कर चोरी उजागर हुई है। ऐसे रैकेट्स में कई बार प्रोफेशनल्स जैसे कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कंसल्टेंट्स और दलालों की भूमिका भी सामने आई है। न्यायालयों ने भी अब इस प्रवृत्ति को गंभीर मानते हुए कई मामलों में जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है, और अपराध की प्रवृत्ति को पूर्व-नियोजित और संगठित आर्थिक अपराध करार दिया है।


सरकार ने फर्जी ITC की रोकथाम के लिए कई तकनीकी उपाय भी किए हैं। जैसे कि — अब केवल GSTR-2B में परिलक्षित ITC ही वैध माना जाता है। साथ ही, Aadhaar आधारित सत्यापन, संदेहास्पद रजिस्ट्रेशन पर Rule 21A के अंतर्गत निलंबन, और Risk-Based Scrutiny जैसी व्यवस्थाएँ भी लागू की गई हैं। इससे यह स्पष्ट है कि GST प्रशासन अब केवल डाटा पर निर्भर नहीं रहकर डेटा विश्लेषण, डिजिटल निगरानी और कानूनी कार्रवाईतीनों को साथ लेकर चल रहा है।

इसलिए आज के समय में प्रत्येक व्यवसायी, कर सलाहकार, और GST पेशेवर को चाहिए कि वह पूर्ण सावधानी बरते। केवल उन्हीं सप्लायर्स से व्यापार करें जो GSTR-1 नियमित रूप से फाइल करते हैं, हर महीने GSTR-2B के अनुसार ITC क्लेम करें, और बिना आपूर्ति के किसी भी बिल या दस्तावेज़ से दूर रहें। किसी भी प्रकार की संदेहास्पद गतिविधि आपको न केवल कानूनी पचड़ों में डाल सकती है, बल्कि आपके व्यवसाय, प्रतिष्ठा और स्वतंत्रता — तीनों को नुकसान पहुँचा सकती है।

फर्जी ITC का चलन GST प्रणाली के लिए एक गंभीर चुनौती है, लेकिन सरकार की सख्ती और DGGI की सक्रियता से अब इसपर नियंत्रण लाया जा रहा है। धारा 132 के अंतर्गत कठोर दंड और न्यायालयों की सक्रियता यह दर्शाती है कि इस अपराध के लिए अब 'शून्य सहिष्णुता' की नीति अपनाई जा रही है। अतः हर व्यापारी और सलाहकार का यह नैतिक व कानूनी दायित्व है कि वह पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ GST कानून का पालन करे और राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाए।

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