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09 Jan आत्मविश्वास : सफलता का अदृश्य ब्रह्मास्त्र – “दीनदयाल” सुनील चौरसिया
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"जो खुद पर विश्वास करता है, उसे पूरी दुनिया पर विजय प्राप्त करने से कोई रोक नहीं सकता।" क्या आपने कभी किसी ऐसे व्यक्ति को देखा है, जो जीवन की कठोर परिस्थितियों में भी मुस्कुराता है? जिसके पास न कोई विशेष संसाधन होते हैं, न ही कोई बड़ा सहारा — फिर भी वह निरंतर आगे बढ़ता है और सफलता की ऊंचाइयों को छूता है।तो फिर, उसके भीतर वह ..
08 Dec हर आम आदमी में छुपा है एक विजेता – “दीनदयाल” सुनील चौरसिया
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क्या आपको यकीन है कि आपके अंदर भी एक विजेता छुपा है? शायद नहीं — मगर यही सच है। इस लेख के माध्यम से समझते हैं कि असली जीत मेडल्स में नहीं, बल्कि ज़िंदगी की हर ठोकर से उठकर खुद को निखारने में है। आइए, आत्मबल और संकल्प की ताक़त से अपने भीतर के सच्चे विजेता को जगाइए — और जीवन को नई ऊंचाई दीजिए। जब हम “विजेता” शब्द सुनते हैं, तो अक्सर हमार..
17 Oct जहां  भरोसा होता है, वहां रास्ते खुद बनते हैं – “दीनदयाल” सुनील चौरसिया
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  क्या कभी आपने सोचा है कि सफलता केवल मेहनत से मिलती है या किसी के विश्वास से भी? क्या एक पत्नी का अडिग भरोसा किसी पति की ज़िंदगी बदल सकता है? क्या सिर्फ़ “हिम्मत” और “सपना” काफी है, या उसके साथ चाहिए होता है एक अदृश्य सहारा? क्या कभी एक छोटे सपने ने मिलकर एक बड़ी कहानी लिखी है? अगर आपके मन में भी ये सवाल हैं, तो यह प्रेरक कथा आपको बताएगी —..
15 Oct अगर इरादे मज़बूत हों, तो हालात कभी दीवार नहीं बनते – “दीनदयाल” सुनील चौरसिया
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क्या आप भी अपनी मुश्किलों से थक चुके हैं? क्या कभी ऐसा लगा है कि आपकी राह में आ रही दीवारें कभी न टूट सकेंगी? यह कहानी उन दो युवाओं की है, जिन्होंने खुद को मुश्किलों में घिरा हुआ पाया, लेकिन उनके इरादे इतने मजबूत थे कि उन्होंने उन दीवारों को पार कर लिया। जानिए कैसे आनंद और प्रीति ने अपनी मेहनत और विश्वास से अपनी किस्मत बदल डाली।..
21 Aug सफलता हमेशा रहे संग, जब मन में हो संकल्पों की उमंग : - “दीनदयाल” सुनील चौरसिया
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क्या आप भी कभी टूटी हुई उम्मीदों, थके हुए हौसलों और असफलताओं के अंधेरे से गुज़रे हैं? क्या आपको भी कभी लगा कि अब कुछ शेष नहीं बचा...? अगर हाँ — तो यह कहानी सिर्फ एक प्रेरणा नहीं, बल्कि जीवन को दोबारा जीने का एक नया दृष्टिकोण है। पढ़िए, कैसे एक साधारण संकल्प ने असाधारण सफलता की नींव रख दी… हर किसी को किसी न किसी मोड़ पर ऐसा अनुभव होता है, जब ..
03 Aug सिर्फ नौकरी नहीं — उद्देश्य से जुड़ा जीवन चुनिए -
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आज की दुनिया में जीवन जैसे एक अंतहीन दौड़ बन गया है। हर सुबह अलार्म की तेज़ आवाज़ से आंखें खुलती हैं, तैयार होकर हम उसी तयशुदा रूटीन की ओर भागते हैं — ऑफिस, मीटिंग्स, ईमेल्स, टारगेट्स और कभी न खत्म होने वाले डेडलाइन्स। यह सब हम इसलिए करते हैं ताकि महीने के अंत में एक वेतन मिले, बिल भरे जाएं और जिंदगी कुछ दिनों के लिए आगे बढ़ सके। धीरे-धीरे ह..
21 Jul जहां चाह, वहां राह : एक प्रेरणादायक जीवन यात्रा – “दीनदयाल” सुनील चौरसिया
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"क्या सिर्फ एक सच्ची चाह से पूरी ज़िंदगी बदल सकती है?" एक गरीब गाँव के लड़के ने दुनिया को ये साबित कर दिखाया — जब मन में ज़िद हो, तो हालात भी घुटने टेक देते हैं। ये सिर्फ एक कहानी नहीं... ये उस जज़्बे की मिसाल है जो हर हार को जीत में बदल देता है। जानिए कैसे 'जहां चाह, वहां राह' सिर्फ कहावत नहीं, बल्कि ज़िंदगी की हकीकत बन गई। इस ल..
15 Jul सिर्फ ज्ञान नहीं… सफलता की असली चाबी है व्यवहार कुशलता! – “दीनदयाल” सुनील चौरसिया
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हम अक्सर यह सोचते हैं कि जीवन में सफलता पाने के लिए बस मेहनत और ज्ञान ही पर्याप्त हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि सफलता केवल आपके ज्ञान पर नहीं, बल्कि आपके व्यवहार की कुशलता पर भी टिकी होती है। व्यवहार कुशलता वह कला है जिसमें आप हर परिस्थिति में लोगों से इस तरह बात करें, पेश आएं और जुड़ें कि सामने वाला आप पर भरोसा करे, आपके प्रति सम्मान महसूस करे और आपक..
04 Jul Learning and Experience  are Gurus of Life - By Sunil Chaurasia
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"Every experience is a valuable lesson in the school of life. Embrace challenges as opportunities, and let them empower you to reach new heights. With each step, gain knowledge, understanding, and the courage to forge ahead. Embrace the power of learning and experience, and transform your life into a masterpiece of growth and advancement."Life is a..
01 Jul हर अंधकार... एक नई शुरुआत की दस्तक है - “दीनदयाल” सुनील चौरसिया
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कभी-कभी जीवन हमें इतनी जोर से झटका देता है कि लगता है जैसे ज़मीन ही पैरों के नीचे से खिसक गई हो। जिन रिश्तों पर भरोसा था, वे साथ छोड़ जाते हैं। जिन सपनों को सीने से लगाए फिरते थे, वे चकनाचूर होकर आंखों के सामने बिखर जाते हैं। और जब हम चारों ओर नज़र दौड़ाते हैं — तो न कोई समझने वाला होता है, न कोई सहारा देने वाला। बस एक सन्नाटा होता है — ऐसा सन्ना..
24 Jun संघर्ष ही पहचान है : जो टूटता नहीं, वही जीतता  है - “दीनदयाल” सुनील चौरसिया
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आज का युवा सबसे अधिक ऊर्जावान है, सबसे अधिक प्रतिभाशाली भी है, लेकिन शायद सबसे अधिक उलझा हुआ भी। एक ओर उसके पास तकनीक है, सूचना का महासागर है, सुविधाएं हैं — और दूसरी ओर उसके भीतर गहराता डर, अस्थिरता और दिशाहीनता जो उसे अंदर से तोड़ रही है। वह जानता है कि उसमें सामर्थ्य है, वह कुछ कर दिखाना चाहता है — कोई वैज्ञानिक बनना चाहता है, कोई कलाकार, कोई ..
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